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भीष्म पंचक
November 5, 2019

तुलसी विवाह

तुलसी विवाह:-
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी जो कि देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जानी जाती है,इस पुण्य एकादशी के दिन से हीं कुछ लोग तुलसी विवाह का आयोजन करते हैं,तुलसी वैष्णव धर्म को मानने वालों का परम आराध्य है। तुलसी का विवाह भगवान् के विग्रह के साथ कुछ लोग पूरे धूमधाम से करते हैं।
एक पौराणिक कथा के अनुसार वृंदा ने भगवान् विष्णु को यह श्राप दिया था कि तुमने मेरा सतीत्व भंग किया है,इसलिये तुम पत्थर के बन जाओ। भगवान् विष्णु ने वृंदा के इस श्राप को स्वीकार करते हुये कहा की मैं तुम्हारे सतीत्व का आदर करता हूँ परन्तु तुम तुलसी बनाकर सदा मेरे साथ रहोगी जो मनुष्य कार्तिक एकादशी के दिन तुम्हारे साथ मेरा विवाह करेगा उसकी समस्त मनोकामनायें पूरी होगी। तभी से शालिग्राम और तुलसी का विवाह भगवान् विष्णु और लक्ष्मी के प्रतीक रूप में किया जाता है।
इस दिन तुलसी के पौधे के गमले को गेरू रंग से रंगकर और सजाकर उसके चारों तरफ ईख का मण्डप बनाकर उसके ऊपर चुनरी उढ़ाकर गमले को साड़ी में लपेटकर तुलसी को चूड़ी पहनाकर सर्वप्रथम गणपति आदि का पूजन करके शालिग्राम और तुलसी का विधिवत पूजन करते है,उसके बाद सिंहासन में रखे हुये शालिग्राम को लेकर तुलसीजी की सात परिक्रमा करते हैं और उसके बाद भगवान् का शाखोचार करके आरती आदि करके विवाहोत्सव को पूर्ण कर देते हैं। विवाह के सामान हीं कार्य होते हैं और मंगल गीत आदि गाये जाते हैं।
तुलसी विवाह संपन्न करने से दाम्पत्य जीवन में आ रही समस्याओं का निवारण होता है,साथ हीं विवाह में आ रही अड़चनें भी समाप्त होती हैं। तुलसी विवाह से कन्यादान जैसे पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस वर्ष अर्थात सन् 2019 में दिनाँक 08 नवम्बर दिन शुक्रवार को तुलसी विवाह आयोजित होगा।दिनाँक 08 नवम्बर 2019 को दोपहर 01:30 बजे से द्वादशी पर्यन्त अपनी सुविधानुसार स्थिर लग्न में तुलसी विवाह संपन्न किया जा सकता है।

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