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भीष्म पंचक

:-भीष्म पंचक:-
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक की पाँच तिथियों को भीष्म पंचक कहा जाता है। जो लोग पूरे एक महीने तक कार्तिक के व्रत का पालन नहीं कर सकते,वे लोग इन पाँच दिनों में हीं पूरे कार्तिक मास के व्रत का फल प्राप्त कर लेते हैं। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर पापों के नाश एवं धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की प्राप्ति हेतु इस व्रत का अनुष्ठान करना चाहिये।भीष्म पितामह ने पांडवों को ज्ञान व्रत रखकर दिया था जिस कारण यह भीष्म पंचक के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
महाभारत के युद्ध के पश्चात् भगवान् कृष्ण पांडवों को लेकर भीष्म पितामह के पास गये और उनसे पांडवों को ज्ञान देने का अनुरोध किया। शरशैय्या पर लेटे हुये भीष्म पितामह ने भगवान् कृष्ण के अनुरोध को स्वीकार करके भगवान् कृष्ण सहित पांडवों को राज धर्म,मोक्ष धर्म आदि का ज्ञान प्रदान किया। भीष्म पितामह द्वारा यह ज्ञान देने का सिलसिला एकादशी से पूर्णिमा तक अर्थात पाँच दिन तक चला। भगवान् कृष्ण ने कहा यह पांच दिन आपके द्वारा ज्ञान देने के कारन अत्यन्त मंगलकारी हो गये और भविष्य में इन पांच दिनों को भीष्म पंचक के नाम से जाना जायेगा।
इस वर्ष अर्थात् 2019 में भीष्म पंचक दिनाँक 08 नवम्बर से दिनाँक 12 नवम्बर 2019 तक है।

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